ज़िंदगी की दौड़ में.....

ज़िंदगी की दौड़ में
वह पल फिर न मिल पाएँगे
दोस्ती निभाने के,
वो प्यार फिर से पाने के,
कहे-से उन अनकहे रिश्तों की बात
वो होती-सी , न होती भी
कितनी ही मुलाकात....
अजनबी कहलाने वाले लोगों के लिए
धड़कने वाले जज़्बात....
इस ज़िन्दगी की भाग-दौड़ में सब खो गया है।
इंसान ,इंसान से भागता, दुनिया की चकाचौंध में खो गया है।
रिश्ते निभाने का समय नहीं,
प्यार जताने के समय नहीं,
न समय है रूठ जाने का,
न रूठे हुए को दुलार-से मनाने का,
न प्यार करने का,
न प्यार में डूब जाने का....
ज़िन्दगी की आपा-धापी में
भागा फिर रहा है आदमी.....😢

Comments

Post a Comment