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कुछ कही अनकही

आज फिर वो सोच रही थी कि काश वो वक़्त थम जाता और वो भी अपने मन की बात कह जाती। आज उस अनकही बात के दर्द ने तृषा के जीवन को गहराई तक झकझोर दिया। दूसरे शब्दों में कहें तो बिखेर दिया ।अ...

कुछ कही, कुछ अनकही...

कुछ कही, अनकही कितनी बातें होती हैं... कुछ कह दी जाती हैं, तो कुछ छोड़ दी जाती है ; खुद समझ जाने के लिए लेकिन ये छोड़ दी गई बातें अक्सर दे जाती है एक टीस उस दर्द की जिसे बयाँ किया नहीं जा सकता अबूझ पहेली की तरह....।