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ज़िंदगी की दौड़ में.....

ज़िंदगी की दौड़ में वह पल फिर न मिल पाएँगे दोस्ती निभाने के, वो प्यार फिर से पाने के, कहे-से उन अनकहे रिश्तों की बात वो होती-सी , न होती भी कितनी ही मुलाकात.... अजनबी कहलाने वाले लोगो...

अकेलापन

कितना दर्द भरा है न साथ रहकर भी अकेलापन झेलना..... अक्सर इंतज़ार में रहती हूँ मैं कि कब, कब ऐसा समय होगा जब मुझे देखोगे तुम, मुझसे बातें करोगे, मेरे रूठने पर मनाओगे मुझे और फिर कुछ ...

कुछ कही अनकही

आज फिर वो सोच रही थी कि काश वो वक़्त थम जाता और वो भी अपने मन की बात कह जाती। आज उस अनकही बात के दर्द ने तृषा के जीवन को गहराई तक झकझोर दिया। दूसरे शब्दों में कहें तो बिखेर दिया ।अ...

कुछ कही, कुछ अनकही...

कुछ कही, अनकही कितनी बातें होती हैं... कुछ कह दी जाती हैं, तो कुछ छोड़ दी जाती है ; खुद समझ जाने के लिए लेकिन ये छोड़ दी गई बातें अक्सर दे जाती है एक टीस उस दर्द की जिसे बयाँ किया नहीं जा सकता अबूझ पहेली की तरह....।